सुनहरा रिश्ता
सुनहरा रिश्ता तुम कितनी प्यारी, समझदार हो। अपना सारा ग़म भुलाकर, हमेशा मुझे हसाती हो। जब भी तुम मेरे साथ रहती, किसी और का ख्याल नही आता मुझे। तुमसे बाते करते-करते कब गुज़र जाता वक्त, यह भी पता नही चलता मुझे। परेशान होऊं अगर, तो देखा नही जाता तुमसे। दौड़ कर चली आती, अपनाने हर परेशानियां मेरी। देखकर चेहरा समझ जाती, हर भावना मेरी। कभी माँ की तरह समझती, तो कभी बहन की तरह साथ देती। रूठ जाऊँ मैं अगर , कभी नाराज़ न हुई तुम। हमेशा मेरा हाथ थाम कर, हर रास्ते पर साथ देती तूम। तुम्हारा चेहरा देखे बिना, दिन नही गुज़रता मेरा। दिल से एकही ख्वाहिश है, की हाथ न कभी छुटे तेरा वादा है तुमसे, कभी दूर न जाउंगी मैं। नए समय के साथ, खुदको नही बदलूंगी मैं। Discription: This poem is dedicated to my best friend. In this I have expressed my feelings towards her.