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Showing posts from February, 2019

सुनहरा रिश्ता

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                      सुनहरा रिश्ता     तुम कितनी प्यारी, समझदार हो। अपना सारा ग़म भुलाकर, हमेशा मुझे हसाती हो। जब भी तुम मेरे साथ रहती, किसी और का ख्याल नही आता मुझे। तुमसे बाते करते-करते कब गुज़र जाता वक्त, यह भी पता नही चलता मुझे। परेशान होऊं अगर, तो देखा नही जाता तुमसे। दौड़ कर चली आती, अपनाने हर परेशानियां मेरी। देखकर चेहरा समझ जाती, हर भावना मेरी। कभी माँ की तरह समझती, तो कभी बहन की तरह साथ देती। रूठ जाऊँ मैं अगर , कभी नाराज़ न हुई तुम। हमेशा मेरा हाथ थाम कर, हर रास्ते पर साथ देती तूम। तुम्हारा चेहरा देखे बिना, दिन नही गुज़रता मेरा। दिल से एकही ख्वाहिश है, की हाथ न कभी छुटे तेरा वादा है तुमसे, कभी दूर न जाउंगी मैं। नए समय के साथ, खुदको नही बदलूंगी मैं। Discription: This poem is dedicated to my best friend. In this I have expressed my feelings towards her.
                            प्यार का नतीजा माँ ओ माँ कहते शमिता घर के अंदर आ गयी। वह अचानक रोने लगी और माँ से कहा कि 'मुझे ये शादी नही करनी है'।  यह सुनकर माँ दंग रह गयी।थोडी देर बाद, माँ उसे पूछने लगी. ऐसा क्यों कह रही हो तुम' , तुम्हे पता है ना कि कल तुम्हारी शादी है.... तो फिर ऐसी क्या बात हो गयी तुम दोनों के बीच की तुम शादी तक तोड़ने राज़ी हो गयी हो? शमिता ने माँ के सवालों का जवाब देते हुए कहा, मुझे पता है माँ कि मैं राहुल से कितना प्यार करती हूँ और उससे ही शादी करना चाहती थी। मगर आप ही बोलिये माँ की मैं उस इंसान से कैसे शादी करू जिसे मेरे पर जरा भी यकीन नही। मैं यह भी जानती हूं की मैं आपसे कितना लड़ी, उस्से शादी करने के लिए। लेकिन माँ अब बस ,बहुत हो गया....... शमिता की बातें सुन कर माँ वही बैठ गयी। माँ को लगा कि शमिता ने अपना होश खोया है।यह बात घर मे आग की तरह फैल गयी।सब लोग आपस मे बात करने लगे।कुछ लोगों ने तो घर अपने सर पर उठा लिया। घर का वातावरण बिगड़ गया। थोडे वक्त बाद शमिता की चाची उसके पास आ गयी और उसे...

दूरियां

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दूरियां                        जिंदगी ये खुशियों से भरी होती है। यह में जानती हूँ। मगर दुख के काले पहाड़ भी होते है। यह भी मैं मानती हूँ। दो दिल एक जान बने है फिर समय क्यों पलट गया है? प्यार ने दर्द का श्राप क्यों दिया क्या प्यार करना कोई गुन्हा है? खुशियों का हमेशा होता था पहले सुर्योदय। फिर आज क्यों महसूस हुआ तुझे खोने का वही भय। पलके झपकना भूल गए है, चाँद के इंतज़ार में। जम गये है आँसू, इन सूखे हुए आँखों मे। तेरे कठोर शब्दो का नही, बल्कि मेरे साथ तू न होने का है गम। इन दूरियों के दुख का जिम्मेदार हो तुम या है हम? खोया खोया है मन बैठा किसी अंधेरे में। ना लगे किसी मे मेरा मन ना डूबे किसी और के प्यार में। आत्मा मेरी चिखती है तड़पती है तुझे देखने के लिए। याद रखना... आज मुझे तुम जितना सताओगे उतने ही रोओगे तुम मेरे लिए। एक दुसरे के साथ ही जिंदगी बितानी है। यह हमने वादा था किया। फिर इतने तुम क्यों रूठे हो? जो तुमने आज मुझे इतना पराया बना दिया? विशवास वह प्यार की डोरी, जो हमे ब...
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                   मन की बात मैंने ऐसा क्या किया जो आप मुझे तोड़ रहे हो? क्या मैं इतनी बुरी हूँ जो आप मुझे मोड़ रहे हो? जहाँ दुर्गा माँ की पुजा करते है क्या वहाँ लड़की होना पाप है? मुझे भी यह हसीन दुनिया देखनी है तो फिर मेरी हत्या करना क्या न्याय है? सजीव तो स्त्री-पुरूष दोनो है फिर स्त्री को निर्जिव क्यों बना रहे हो? असमानता की मशाल जलाने वाले.... याद रखना.... पैदा करने वाली भी एक औरत ही थी, जिसकी वजह से आज तुम अपने पैरों पर खड़े हो। संसार का खेल है, यह मैं अब जान चुकी हूँ। और इस खेल को किस तरह जितना है, यह भी अच्छी तरह से मैं सिख चुकी हूँ। जितना मुझे तुम तराशोगे सूरज की तरह मैं चमकने लगूँगी। हात लगाओ तो जल जाओगे खुद की रक्षा के लिए  मैं दुर्गा भी बनुँगी। यह जिंदगी मेरी है  किसी बाजार में बेचीं हुई चीज नही। मेरी जिंदगी बर्बाद करने का तुझे कोई हक्क नही। मुझे तुम दाग न समझना दाग तो चाँद में भी होते है। आकाश में भले ही लाखो तारे हो मगर चाँद उनमें सिर्...
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                      माँ आप कितनी अच्छी हो,-[2] ड़ट कर दुनिया का सामना करती हो। पापा ना हुए तो क्या हुआ, पापा की कमी आप ही पूरे करती हो। मैं भाग्यवान हूँ ,-[2] क्योंकि मुझे आप जैसी कोई मिली। शायद पिछले जनम में,मैने कुछ पुन्य किये होंगे, इसलिए तो मुझे आप जैसी माँ मिली। वह दिन भी क्या दिन थे,-[2] जब प्रहर में आप जल्दी उठती। मैं स्कूल जाने के लिए हड़बड़ी मचाती, तो नाश्ता खिलाने के लिए आप मेरे पिछे लगती। भूखे पेट सोऊँ अगर,  उड़ जाती है भूख तेरी। आपके चरणों मे ही बसी है, स्वर्ग सी ये दुनिया मेरी। लाखो की हसी चेहरे पर, छिपाये दर्द सारे आँचल में। कमी ना होने दी किसी की मुझे, भले ही दो आने हो बटवे में। न जाने आप नही होती, तो क्या होता मेरा, बिगड़ जाता ये जीवन मेरा, जो खुशियों से अब है भरा। हर पल मेरी छाया बनकर, सही मार्ग मुझे दिखाया है। जिस मंजिल पर आज खड़ी हूँ, आपने ही मुझे इस काबिल बनाया है। Discription: This poem is dedicated to my mom. Because of her I am on the right path today. Inspite ...