प्यार का नतीजा

माँ ओ माँ कहते शमिता घर के अंदर आ गयी। वह अचानक रोने लगी और माँ से कहा कि 'मुझे ये शादी नही करनी है'।  यह सुनकर माँ दंग रह गयी।थोडी देर बाद, माँ उसे पूछने लगी. ऐसा क्यों कह रही हो तुम' , तुम्हे पता है ना कि कल तुम्हारी शादी है.... तो फिर ऐसी क्या बात हो गयी तुम दोनों के बीच की तुम शादी तक तोड़ने राज़ी हो गयी हो? शमिता ने माँ के सवालों का जवाब देते हुए कहा, मुझे पता है माँ कि मैं राहुल से कितना प्यार करती हूँ और उससे ही शादी करना चाहती थी। मगर आप ही बोलिये माँ की मैं उस इंसान से कैसे शादी करू जिसे मेरे पर जरा भी यकीन नही। मैं यह भी जानती हूं की मैं आपसे कितना लड़ी, उस्से शादी करने के लिए। लेकिन माँ अब बस ,बहुत हो गया.......
शमिता की बातें सुन कर माँ वही बैठ गयी। माँ को लगा कि शमिता ने अपना होश खोया है।यह बात घर मे आग की तरह फैल गयी।सब लोग आपस मे बात करने लगे।कुछ लोगों ने तो घर अपने सर पर उठा लिया। घर का वातावरण बिगड़ गया। थोडे वक्त बाद शमिता की चाची उसके पास आ गयी और उसे बहुत समझाया की जो कुछ तुम फैसला ले रही हो उससे तुम अपना और हम सब की नाक कटवाओगी। ऐसे सब बहला -फुसला कर शमिता को शादी के लिए राजी किया और सब लोग अपने- अपने कमरे मे सोने चले गए।
सवेरा होते ही , सब लोक अपने काम मे भागदौड़ मचाते है । शमिता उदास ही राहती है।उसे किसी भी काम मे मन नही लगता ।  शादी के मूहरत का समय हो रहा था इसलिए सारे लोग तयार होने लगते है। शमिता को भी अछी तरह से तयार करते है। दोपहर के १:00 बजे शमिता और राहुल की शादी हो जाती है। शमिता उदास होकर और रोते रोते अपने ससुराल जाती है। कुछ दिन बितते है , उन दोनों के बीच मे पहले जैसा प्यार उमड़ आता है। वे लोग एक दूसरे से अच्छी तरह से व्यहवार करने लगते है। इस तरह साल भर में शमिता की गोद भर जाती है। और हुलमित ऐसा नाम उन्होंने अपने लड़के का रखा। हुलमित के साथ दोनो बहुत खुश थे। कभ रात और दिन बीत जाता यह उन्हें पता भी ना चलता । और इसी में हुलमित १ साल का हो जाता है।

शमिता हुलमित की देखभाल करती और राहुल टैक्सी ड्राइवर होने के कारण, कॉलेज की लड़कीयों को कॉलेज छोड़ने का काम करता था। उन लड़कियों में एक खुशी नाम की लड़की भी थी। राहुल को खुशी से प्यार हो जाता है और खुशी भी उससे बहुत प्यार करने लगती है।वह राहुल के लिए अपनी जान भी न्योछावर करने के लिए तैयार थी।यह सब बाते जब शमिता के कानों पर पड़ी तब वह आग के ज्वाला की तरह जलने लगी।

खुशी हर दिन ,रात की समय राहुल को फ़ोन करती और मिलने बुलाती । एक दिन जब खुशी ने फ़ोन किया तब राहुल घर पर न होने के वजह से शमिता ने फ़ोन उठाया और उसने खुशी को बहुत समझाया, लेकिन इतना समझाने पर भी जब खुशी नही मानती तो शमिता को बहुत गुस्सा आता है और वह खुशी को भला बुरा सुनाती है।

ये सब बाते जब खुशी राहुल को बताती है तब राहुल तमतमा जाता है और घर आकर शमिता के साथ लड़ाई करता है, उसे बहुत मारता है।यह भी नही सोचता कि वह उसकी पत्नी है ,जो एक समय उसके दिल से जुड़ी थी, और जान भी देने के लिए तैयार थी। ऐसे ही बहुत दिन बीत गए और शमिता इन सब से परेशान हो गयी थी। फिर भी शमिता के दिल मे राहुल के लिए प्यार कम नही हुआ।

दिन बितते गये।राहुल और खुशी का प्यार हद से ज्यादा बड गया। 21 जून, सोमवार के दिन रहुल और हुलमित दोनो खेल रहे थे।शाम के समय जब राहुल बाहर जाने के लिए निकला, तब हुलमित जोरो से रोने लगा।राहुल ने उसे समझाया कि मैं ही नही बल्कि तुम्हारा चाचू भी तेरे पापा जैसे हैं।उनके साथ हमेशा हस्ते -खेलते रहो,माँ को ज्यादा मत सतना और बड़े होकर दादी का ख्याल रखना, यह सब अपने बेटे को कहकर, 'सुनो मैं काम पर जा रहा हूँ अपना ध्यान रखना ऐसे अपने पत्नी को कहकर वह रात के आठ बजे चला जाता है। उसी समय शमिता को दाल में कुछ काला है ऐसा लगता है,मगर फिर भी वह चुप रही।

दो दिन बीत गए पर राहुल घर नही लौटा तो राहुल के परिवार वालो ने थाने में रपट लिखवाई।तब जाकर पता चला कि खुशी भी लापता है।एक दिन बाद पता चला कि राहुल और खुशी भाग गये है। खुशी के परिवार वालो ने राहुल के परिवार को बहुत तंग किया, उनको मारा-पीटा। सिर्फ उन लोगों ने ही नही, बल्कि थाने में भी पुलिस वालों ने उन्हें बहुत मारा।
फिर पूछताछ शुरू हुई, सब लोग उन्हें ढूंडने लगे। पर उन दोनो का कुछ पता न चला।

शमिता ने तो रो-रोकर खुदका बुरा हाल कर लिया। सिर्फ हुलमित के लिए वह अपना जिंदगी गुजार रही थी।अचानक 15 दिन के बाद राहुल ने अपने बहन ज्योति को फ़ोन किया और कहने लगा कि मैं खुशी से रजिस्टर मैरिज कर रहा हूँ।
उसी वक्त पुलिस ने उसका फोन नंबर ट्रेस किया और वे दोनों पकड़े गए । उन दोनों को वापस उनके गांव में लेकर गए ,थाने में बुलाकर दोनो की पूछताछ शुरू की।तब खुशी ने बोला कि वह अपने मर्ज़ी से गयी थी, राहुल की कोई गलती नही है।उसकी बातें सुनकर पुलिस वालों ने राहुल को कुछ नही किया।उन्होंने राहुल और खुशी को समझाकर छोड़ दिया। खुशी के परिवार वाले राहुल को कुछ न कर पाए क्योंकि, खुशी की भी उतनी ही गलती थी जितनी राहुल की।खुशी के माँ -पिताजी ने खुशी का विवाह किसी और से करके उसे दूसरे गाँव भेज दिया। वहाँ जाने के बाद खुशी सब कुछ भूल गयी।


मगर शमिता कभी भूल न सकी।उसी दुख में वह थी।शमिता अंदर से बहुत टूट गयी। क्या करे उसे कुछ समझ मे नही आया।उसने राहुल के गलतियों को भूल कर उसे फिर अपने जिंदगी में अपना लिया।उसके मन मे अब भी दर्द है। वह सहते रही और एक दिन अचानक बहुत बीमार हो गयी। हस्पताल में इलाज़ करने के बाद मालूम हुआ कि शमिता के दिन नज़दीक आ गये है,वह और न जी पाएगी।यह सब बातें सुनकर राहुल को लगता है कि आसमान और धरती  एक हुई है। वह बहुत रोने लगता है।

चार दिन बाद शमिता का निधन हो जाता है। उसकी गुज़र जाने के बाद राहुल को अपनी गलतियों का एहसास  होता है।और अपने किये कर्म पर वह पछताने लगता है...।

Discription: This story is dedicated to all those mens who commit these type of sins and later on regret on it. A message to all of them, that there is no use of feeling guilty because you can't get back those beautiful days once again. So think many a times before doing anything wrong which can ruin yours and others happiness.




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