दूरियां

दूरियां


                      

जिंदगी ये खुशियों से भरी होती है।
यह में जानती हूँ।
मगर दुख के काले पहाड़ भी होते है।
यह भी मैं मानती हूँ।

दो दिल एक जान बने है
फिर समय क्यों पलट गया है?
प्यार ने दर्द का श्राप क्यों दिया
क्या प्यार करना कोई गुन्हा है?

खुशियों का हमेशा
होता था पहले सुर्योदय।
फिर आज क्यों महसूस हुआ
तुझे खोने का वही भय।

पलके झपकना भूल गए है,
चाँद के इंतज़ार में।
जम गये है आँसू,
इन सूखे हुए आँखों मे।

तेरे कठोर शब्दो का नही, बल्कि
मेरे साथ तू न होने का है गम।
इन दूरियों के दुख का जिम्मेदार
हो तुम या है हम?

खोया खोया है मन
बैठा किसी अंधेरे में।
ना लगे किसी मे मेरा मन
ना डूबे किसी और के प्यार में।

आत्मा मेरी चिखती है
तड़पती है तुझे देखने के लिए।
याद रखना...
आज मुझे तुम जितना सताओगे
उतने ही रोओगे तुम मेरे लिए।

एक दुसरे के साथ ही जिंदगी बितानी है।
यह हमने वादा था किया।
फिर इतने तुम क्यों रूठे हो?
जो तुमने आज मुझे इतना पराया बना दिया?

विशवास वह प्यार की डोरी,
जो हमे बाँधकर रखती थी।
तो फिर क्यों टूट गयी वह डोरी,
जो हमे कभी टूटने न देती थी?

माना रास्ते मे काटें है,
साथ मैं हम उसपर फूल बरसायेंगे।
मगर मुझे पता है...
एक दूसरे के बिना,
हम कभी नही जी पाएंगे।



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